Initiation of inner change center

मंगल ग्राम

मंगलग्राम की स्थापना इस अवधारणा पर आधारित है कि -

  • कोई भी व्यक्ति (समाज) तभी पूर्णतः सुखी हो सकता है, जब वह (बहु संख्या में सदस्य) अपने अंतर्मन (आत्मा/विवेक) की आवाज सुनकर जीवन में निर्णय कर व्यवहार करें।
  • किसी भी व्यक्ति का अंतर्मन कभी भी उसके आंतरिक एवं बाह्य विकास में बाधक नही होगा और न ही उस अनुचित रास्ते पर ले जा सकता है।
  • व्यक्ति के परिपूर्ण जीवन के लिए भौतिक कुशलता के साथ-साथ आंतरिक कुशलता भी समान रूप से आवश्यक है।
  • आजकल आदमी अंतर्मन (conscience) के बजाय सुविधा (convenience) के आधार पर निर्णय कर रहा है और परिणामस्वरूप व्यक्ति के स्वयं के जीवन और समाज में तनाव के लक्षण दिख रहे हैं। इसका परिणाम समाज के भौतिक विकास पर भी नकारात्मक रूप से पड़ रहा है। हमारा यह मानना है कि व्यक्ति निरंतर अभ्यास के माध्यम से अंतर्मन की आवाज सुनकर निर्णय करने के लिए सक्षम बन सकता है। एक बार समाज के बहुसंख्यक व्यक्तियों में यह प्रवृत्ति बन जाने के बाद समाज (ग्राम) के वातावरण में सकारात्मक परिवर्तन निश्चित रूप से आयेगा।
  • यहां यह उल्लेखनीय है कि आंतरिक विकास का यह अर्थ कदापि नहीं है कि भौतिक विकास निरूद्ध कर दिया जाए, बल्कि आंतरिक विकास के हो जाने पर भौतिक विकास निष्कंटक होकर और तेजी से होगा।

इन 5 तथ्यों को ध्यान में रखते हुए मंगलग्राम की इस परिकल्पना को समाज के सम्पूर्ण विकास के आकांक्षी सज्जनों के नैतिक और आर्थिक सहयोग से लागू करने का निर्णय लिया गया है।

मंगल ग्राम परियोजना के तहत प्रत्येक ग्राम में दो समूह गठित होगें -

प्रथम समूह -

पप्रथम समूह में ग्राम के 5 से 10 ऐसे युवा एवं ऊर्जा से भरे प्रौढ़ नागरिक होगें जो -

  • सकारात्मक सोच रखते हों।
  • ससृजनशील हों।
  • जो ग्रामवासियों को स्वीकार हों।

इस समूह का यह दायित्व होगा कि पहले अंतर्मन की आवाज़ सुनकर स्वयं में परिवर्तन लाएं। इस कार्य के लिए उन्हें सर्वप्रथम अंतर्मन की आवाज़ सुनने के लिए "स्वावलोकन" का प्रशिक्षण दिया जावेगा। यह प्रशिक्षण, इस कार्य के प्रशिक्षित ऊर्जावान प्रशिक्षकों द्वारा होगा।

प्रशिक्षण के बाद यह सदस्य सर्वप्रथम स्वयं में निम्नलिखित मानवीय वृत्तियों/गुणों का विकास करेंगे-

GGratitude कृतज्ञता
RRelationship संबंध
EEmotionभावनाएँ
AAwarenessजागरूकता
TTrustविश्वास
FForgivenessक्षमा
RResilienceजिजीविषा
AAcceptanceस्वीकार्यता
MMeaning (purpose)उद्देश्य
EExercising/ healthव्यायाम/स्वास्थ्य
GGivingअर्पण
EEmpathyसमानुभूति
LLearning,Listening and Loveसीखना, सुनना एवंप्रेम

उपरोक्त गुणों को आत्मसात करने के बाद वह इन गुणों का विकास स्व.अवलोकन कार्यक्रम के माध्यम से ग्राम वासियों में करेंगे। हम प्रयास करेंगे सभी शासकीय कर्मचारियों और ग्राम से संबंधित जन प्रतिनिधियों को भी स्व.अवलोकन कार्यक्रम का प्रशिक्षण दिया जाए।

जब ग्राम के नागरिकों में सकारात्मक परिवर्तन परिलक्षित होने लगेंगें, तब उसके पश्चात द्वितीय समूह को सक्रिय किया जाएगा।

द्वितीय समूह –

यह समूह ग्राम पंचायत के सरपंच की अध्यक्षता में गठित होगा। इस समूह में राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संस्थाओं के इन्टर्नस एवं ग्राम स्तरीय सभी शासकीय अधिकारी-कर्मचारी होगें। (जिला प्रशासन से अनुरोध किया जाएगा कि वे सभी शासकीय कर्मचारियों को इस समूह में शामिल होने के लिए निर्देश प्रदान करें।) यह समूह निम्नानुसार कार्यवाही करेंगे

(क) संसाधनों का आकलन -


समूह ग्राम में उपलब्ध समस्त संसाधनों का निम्नलिखित अनुसार आकलन करेंगे -
  • 1. राज्य और केंद्र सरकार के द्वारा विभिन्न योजनाओं के तहत आवंटित राशि
  • 2. ग्राम-स्तर पर उपलब्ध संसाधन
  • 3. ग्राम-वासियों की क्षमता और कौशल
  • 4. ग्राम-वासियों की आवश्यकताएं और आकांक्षाएं

(ख) नियोजन-

  • 1. ग्राम-वासियों की सहमति से उनकी आवश्यकताओं एवं आकांक्षाओं के आधार पर उपलब्ध संसाधनों को ध्यान में रखते हुए ग्राम विकास की योजना तैयार करेंगे। जिसमें ग्राम में स्थाई रोजगार एवं अधोसंरचना निर्माण शामिल होगी।
  • 2. योजना में ग्राम के आर्थिक, सामाजिक और भौतिक तीनों क्षेत्रों के विकास के लिए एक्शनप्लान भी शामिल होगा।
  • 3. समूह द्वारा होगी गई योजना पर ग्राम के सभी सदस्यों से चर्चा की जाएगी और ग्रामसभा से अनुमोदित कराई जाएगी।
  • 4. योजना का क्रियान्वयन संबंधित ग्राम पंचायत द्वारा किया जाएगा।

(ग) अंकेक्षण (आडिट) -

योजना क्रियान्वयन का सामाजिक अंकेक्षण करने में समूह, ग्राम वासियों की सहायता करेगा।

3 - स्वास्थ्य शिविर

स्वास्थ्य शिविर के माध्यम से ग्रामों में टीका करण, खून की जांच एवं विभिन्न बीमारियों की पहचान कराएंगे और ग्राम वासियों को उनके इलाज के लिए प्रेरित करेंगे।

स्वास्थ्य संबंधी विभिन्न पहलुओं, मातृ एवं शिशु, गर्भावस्था के दौरान स्वास्थ्य परीक्षण और सावधानियां, कुपोषण एवं किशोरी बालिकाओं की स्वास्थ्य एवं स्वच्छता से संबंधित समस्याओं आदि के संबंध में ग्राम वासियों में जागरूकता लाई जाएगी। स्वास्थ्य एवं स्वच्छता संबंधी गुड प्रैक्टिस ग्राम वासियों को सिखायेंगे।

4 - समय बैंक

  • शहरों में जनसंख्या के बदलते स्वरूप (छोटे परिवार एवं रोजगार के लिए हो रहे प्रव्रजन) के कारण हमारे अनेक नागरिक विशेषकर वरिष्ठ नागरिक एकाकी जीवन व्यतीत कर रहे हैं। इस कारण बीमारी की अवस्था एवं आकस्मिक परिस्थितियों में उन्हें सहायता की आवश्यकता होती है। ऐसे में इच्छुक संवेदनशील युवक एवं अन्य स्वस्थ नागरिक जिनके पास समय है, वे उनकी सहायता अपना समय देकर कर सकते हैं।
  • समय बैंक इस आवश्यकता की पूर्ति के लिये हमारा प्रयास है। इसे अमलीजामा देने के लिए ''सहायता देने एवं प्राप्त करने इच्छुक नागरिक के पंजीकरण एवं नेटवर्किंग की व्यवस्था'' हमारी वेबसाईट पर उपलब्ध है।
  • सेवा देने के लिए इच्छुक नागरिकों को सेवा प्रदान करने वेबसाइट पर पंजीयन करना होगा। सेवा प्राप्ति के लिए इच्छुक नागरिक इसका लाभ प्राप्त कर सकते हैं। लाभ प्राप्त करने के लिए उन्हें वेब साइट पर पंजीयन करना होगा। हमारे समय बैंक शाखा प्रबंधक दोनों समूहों को नेटवर्क करेंगे। हम निम्नलिखित प्रकार की दो सेवाएं प्रदान करेंगे:-
    • आकस्मिक परिस्थितियों में सहायता
    • एकाकी जीवन बिताने वालों के साथ संवाद
  • समय देकर सेवा प्रदान करने वाले पंजीकृत नागरिकों को हम भविष्य में उन्‍हें आवश्यकता पड़ने पर सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास करेंगे।
  • इस वेबसाइट पर, क्षेत्रीय स्तर पर स्थानीय इच्छुक क्रियाशील नागरिक, जो आपस में सहायता प्राप्त करने वाले एवं सहायता देने के इच्छुक व्यक्तियों के मध्य नेटवर्किंग का कार्य करना चाहते हैं। वे समय बैंक शाखा प्रबंधक के रूप में पंजीयन करा सकते हैं, ऐसे समाजसेवी नागरिकों की प्रारंभिक पड़ताल के बाद समय बैंक प्रबंधक के रूप में नामांकित किया जाएगा। क्षेत्र में एक से अधिक नागरिक, बैंक प्रबंधक का काम करना चाहते हैं तो उनमें से किसी एक को समन्वयक ब्रांच प्रबंधक कहा जाएगा।
  • नेटवर्किंग का कार्य करने हेतु वेबसाइट पर पंजीकृत अच्छा कार्य करने वालों को अपने सीमित साधनों के तहत सामाजिक मान्यता देने/पुरस्कृत करने का प्रयास करेंगे।

5–अच्छाई का दर्पण (mirror of goodness in the society)

  • समाज में नकारात्मक घटनाओं की स्वतः रेखांकित होने की प्रकृति समाचार पत्रों एवं अन्य मीडिया द्वारा नकारात्मक घटनाओं को बढ़ाचढ़ा कर अधिक महत्व देने के कारण समाज में बहुत ही नकारात्मक वातावरण बन रहा है।
  • इस कार्यक्रम के तहत समाज में अच्छा काम करने वाले लोगों और उनके अच्छे कार्यों की जानकारी समाज में प्रचारित होगी ताकि संदेश जाए कि समाज नकारात्मक नहीं है और रहने योग्य है तथा बड़ी संख्या में हम एक दूसरे की केयर करते हैं।
  • इस कार्य के लिए हमारी वेबसाइट पर नागरिक उनके द्वारा किए गए छोटे-छोटे भलाई के कार्य / अच्छाई के कार्य दर्ज कर सकेंगे।
  • इंटरनेट एवं मोबाइल फोन का उपयोग बढ़ रहा है फिर भी बडी संख्‍या में लोग इंटरनेट या ऐप के माध्यम से अपने अच्छे कार्यों को हमारी वेबसाइट पर दर्ज नहीं कर पायेंगे । अतः हमें कॉल सेंटर की सुविधा देना होगी। केंद्र के पास ऐसे संसाधन नहीं हैं कि वह इस कार्य के लिए कॉल सेंटर बना सके परन्तु आधुनिक टेक्नोलॉजी का उपयोग कर मोबाइल फोन के माध्यम से चलता फिरता कॉल सेंटर बना सकते हैं जिसमें इच्छुक नागरिकअच्छा कार्य बताकर उसकी जानकारी दर्ज करा सकें।
  • इस कार्य के लिए हमें स्वयं सेवको(volunteer) की आवश्यकता है जो मोबाइल पर नागरिकों से उनके द्वारा किए गए अच्छाई/भलाई के कार्यों को सुनकर हमारी वेबसाइट पर दर्ज कर सकेंगे। मोबाइल पर अच्छे कार्यों को सुनकर हमारी वेबसाइट पर दर्ज करने के लिए इच्छुक नागरिकों को हम उनके आवेदन करने पर यह सुविधा प्रदान करेंगे कि वह अपनी सुविधानुसार सप्ताह में निर्धारित दिन निर्धारित समय पर हमें अपनी सेवाएं दे सके। ऐसे नागरिक भी समूह बनाकर अच्छा काम करने वालों को चिन्हांकित करने, उन्हें पहचान दिलाने में हमारी सहायता कर सकेंगे।
  • हमारी टीम अच्छा कार्य करने वाले लोगों और अच्छे कार्यों का सम्‍मान भी करेगी।

6 अन्तर्निरीक्षण

आदि मानव से आधुनिक मानव तक की मानव विकास यात्रा में, समृद्धि और संसाधनों में बहुत वृद्धि हुई है परंतु मानवीय समस्याएं यथावत हैं। संसार के बड़े भू भाग पर रोटी, कपड़ा, मकान, मूलभूत स्वास्थ्य एवं पानी जैसी समस्याओं के हल के बाद अब हमारे पास अनाज के भंडार हैं, अच्छी सड़क, अच्छी यातायात व्यवस्था, अच्छी संचार व्यवस्था, अच्छी चिकित्सा व्यवस्था, स्वच्छ और सुंदर मकान आदि सब है, परंतु सुख, शांति, सामंजस्य सहकार सहयोग एवं आनंद की हमारी निर्विवाद सामूहिक आकांक्षा के बावजूद समाज में दुख, हिंसा, ईर्ष्या, प्रतिस्पर्धा, क्रूरता, बैर, लालच और तनाव बढ़ रहा है।

मानव की इस विकास यात्रा में जानकारी की महत्वपूर्ण भूमिका है, परन्तु हम यह नहीं जानते हैं कि इसने व्यक्ति एवं समाज के साथ क्या किया है। हम समाज और व्यक्ति के अन्तर संबंधों को भी नहीं जानते हैं। इस बात के लिए किसी प्रमाण की आवश्यकता नहीं है कि मानव और समाज में बहुत गहरा संबंध है।

आइये हम मिल-जुलकर एक परख पड़ताल करें एवं देखें

  • “मैं” (self) क्या है
  • मानव समाज का निर्माता है और समाज मानव का निर्माता है। क्या यह कहा जा सकता है कि मैं(तुम) ही समाज हूँ और समाज ही मैं (तुम) है।
  • मनुष्य के परिवर्तन (निर्णय करने की प्रक्रिया) में जानकारी का स्थान क्या है?

अंर्तनिरीक्षण कार्यक्रम का संक्षिप्त विवरण निम्नलिखित अनुसार है:-

  • अन्तर्निरीक्षण कार्यक्रम मिलजुल कर स्वयं अनुभूत और अन्वेषित अनुभवों के आधार पर स्वयं सीखने का कार्यक्रम है। यह सभी तरह की वैज्ञानिक, मनोवैज्ञानिक एवं दार्शनिक धारणाओं, सिद्धांतों एवं पूर्वाग्रहों से मुक्त है।
  • इसके लिए केन्द्र में ऐसा वातावरण उपलब्ध होगा जिसमें प्रतिभागी स्वयं अपना अन्वेषण कर सीख सकेंगे। अन्वेषण एवं समझ विकसित करने के लिए मूल रूप से हमें देखने (seeing), नेति (negation), अनुमान, संवाद (communication), अनुभव (experience) और अनुभूति (feelings) एवं साझा करण (sharing) की पद्धति का उपयोग करेंगे। मौन वार्ता हमारा प्रमुख उपकरण होगा।
  • अन्तर्निरीक्षण प्रारंभ करने के पूर्व यह तय करना जरुरी है कि प्रतिभागी परिवर्तन के लिए तैयार है।
  • सामान्य रूप से देखने, अवलोकन करने पर हमें अपने अस्तित्व के दो खंड मिलते हैं। एक हमारा शारीरिक स्वरूप और दूसरा हमारा चैतन्य स्वरूप।
  • इस स्वरुप को देखने समझने के लिए हमें किसी भी प्रकार के प्रमाण की आवश्यकता नहीं है, ये स्वयंसिद्ध है।
  • सामान्य बोलचाल में हम शरीर और संसार से संबंधों को अपना बाह्य खण्ड और चेतना को अपना आंतरिक खण्ड/अन्तःकरण बोलते हैं। सामान्य धारणा/मान्यता है, कि बाह्य खंड और अंतःकरण दो अलग-अलग हिस्से हैं। हम अवलोकन करेंगे कि क्या बाह्य खण्ड और आंतरिक खण्ड, दो स्वतंत्र खंड है या इनके सम्मिलन से हम पूर्ण होते हैं। मिल जुल कर इस बात पर भी गहनता पूर्वक अन्वेषण और अवलोकन करेंगे कि क्या वास्तव में हमारे दो खंड हैं? अथवा यह एक भ्रम मात्र है।
  • इन दोनों स्वरूपों के स्वस्थ विकास की आवश्यकताएं अलग-अलग है, जिनकी पूर्ति जरुरी है। इन्हें समझने के लिए शांत-वातावरण, स्वस्थ-विमर्श, तटस्थ-अवलोकन और गहन-अन्वेषण जरुरी है। कार्यक्रम में इन स्वरूपों में सामंजस्य प्राप्त करने की आवश्यकता को समझने का प्रयास भी किया जायेगा ।
  • कार्यक्रम के दौरान जानकारी (ज्ञान) और विचार का स्वरूप और उनका प्रभाव, गंभीरता, जवाबदारी, संवाद, सुनना, संबंध, मन की अव्यवस्था, मैं और संसार का स्वरूप, प्रेम, जीवन एवं मृत्यु इत्यादि पर, प्रश्नों के माध्यम से स्व-अनुभूति के आधार पर अन्वेषण करेंगे और तर्क के आधार पर उनका स्वरूप देखेंगे।
  • हम ऐसा कोई आश्वासन या वादा नहीं करते हैं कि, आपको किसी प्रकार का मजा, हर्ष, खुशी, आमोद, आनंद (joy enjoyment jubilation bliss) अथवा सुख प्राप्त ही होगा, परंतु हमारे केंद्र के कार्यक्रम में साथ कार्य के दौरान आपको निश्चित तौर पर ऐसे अनुभव अवश्य प्राप्त होंगे, जिनके माध्यम से आपके जीवन में परिवर्तन होने की संभावना बनेगी।

हम आशा करते है कि, इस कार्यक्रमों में भाग लेने वाले प्रतिभागी अपने जीवन की अव्यवस्थाओं को समझ कर उन्हें दूर कर सकेंगे। प्रतिभागी कार्यक्रम के दौरान अपने लिए उपयुक्त विधि स्वयं विकसित करेंगे।

7 स्वावलोकन

आजकल व्यक्ति अंतर्मन (conscience) की आवाज के स्थान पर सुविधाओं (convenience) के आधार पर निर्णय ले रहा है। वह परिवार एवं सामाजिक दबाव में कार्य करता है। वह चाहता कुछ है और करता कुछ है। इस कारण उसे जीवन एक संघर्ष लगता है। “स्वावलोकन कार्यक्रम” संघर्ष से मुक्त होने का एक उपकरण है। इस कार्यक्रम के तहत प्रतिभागी को अपने अंतःकरण की आवाज सुनने और समझने की विधि उपलब्ध कराई जाएगी। इसके माध्यम से प्रतिभागी अपनी आवश्यकताओं और उनकी प्रकृति को समझ कर जीवन सुखी कर सकेंगे।

8.योगासन

जीवन के लिए स्वस्थ शांत मन और स्वस्थ शरीर दोनों आवश्यक हैं जहां आत्म निरीक्षण एवं स्वावलोकन कार्यक्रम हमें स्वस्थ मन देते हैं वहीं स्वस्थ शरीर के लिए योग सहायक है दुनिया में रहने वाले हम सब अब योग आसन और उसके लाभ को जाने लगे हैं। प्रत्येक आसन विशेष क्रम और प्रक्रिया से किया जाता है प्रत्येक आसन का एक विशिष्ट लाभ है माना जाता है कि योगासन से अनेक बीमारियां भी दूर होती है।

इंटरनेट एवं यूट्यूब इस युग में अब इन माध्यम से प्राप्त जानकारी के आधार पर घर बैठे योग आसन अभ्यास का प्रचलन बढ़ गया है परंतु यह जानकारी बनाने वाला व्यक्ति कितना प्रमाणिक और विश्वसनीय है यह मालूम नहीं होता और हम कई बार अमानक एवं गलत तरीके से योगासन करते है हमें नुकसान भी होता हैl हमारी वेबसाइट पर जाने-माने योगाचार्य पंडित श्री पवन गुरु परामर्श के लिए उपलब्ध है आप उनसे ऑनलाइन संपर्क कर प्राणायाम एवं विभिन्न आसन संबंधी जानकारियां और समस्याओं का निराकरण कर सकते हैं।

9.सहायक बने : दान दे (Be the support : please donate)

केंद्र के लिए आवश्यक पूंजीगत संरचनाओं का निर्माण केंद्र के संचालक स्वयं अपने साधनों से करेंगे। हम जानते हैं कि हमारे कार्यक्रम व्यावसायिक आधार पर संचालित नहीं हो सकते हैं उनको नैतिक समर्थन और प्रोत्साहन की आवश्यकता है। अतः हमें केंद्र के दैनंदिनी संचालन के लिये, केंद्र की योजनाओं कार्यक्रमों और सिद्धांतों पर विश्वास करने वाले नागरिकों से सीमित मात्रा में सहायता चाहिए।

अतः अनुरोध है कि, कृपया समय और धन राशि के रूप में सहायता प्रदान करें।

  • मानद सदस्य बनें
  • समय बैंक में खाता खोलें समय जमा करें
  • अच्छाई का दर्पण के वालेण्टीयर बने
  • प्रायोजक बनें
    • मंगल ग्राम के विकास कार्यक्रमों के लिए
    • स्वास्थ्य शिविरों के लिए
    • इंटर्नशिप कार्यक्रम के लिए